आर्यभट्ट विज्ञान क्लब, रंका के सदस्यों ने सामुदायिक लाभ हेतु विज्ञान प्रसार एवं राष्ट्रीय संस्थान आपदा प्रबंधन के सहयोग से आयोजित आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण में भाग लिया
गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान एवं विज्ञान प्रसार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के संयुक्त प्रयास से सामुदायिक लाभ हेतु आपदा प्रबंधन विषय पर आयोजित राष्ट्रिय प्रशिक्षण कार्यक्रम मे आर्यभट्ट विज्ञान क्लब, रंका को आमंत्रित किया गया था । 22 से 26 नवंबर तक चलने वाले इस कार्यक्रम के बारे में बताते हुए विज्ञान क्लब के समन्वयक आलोक चौधरी ने बताया कि विभाग द्वारा देश के सबसे सक्रिय विज्ञान क्लब के समन्वयकों से प्रशिक्षण में भाग लेने के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए इच्छुक लोगो का नाम माँगा गया था। क्लब के समन्वयक द्वारा दो सदस्यों का नाम इस प्रशिक्षण के लिए अनुशंसित किया गया था, जिसमे दोनों का चयनित कर नोएडा में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था । चयनित सदस्यों में क्लब के मोहित कुमार चौधरी एवं अविनाश कुमार शामिल थे। इस प्रशिक्षण शुल्क समेत किराया, भोजन एवं आवास की व्यवस्था भारत सरकार द्वारा उठाई गई। इस प्रशिक्षण में पूरे देश भर में 50 लोगों को चयनित किया गया था । कार्यक्रम का शुभारंभ विज्ञान प्रसार के डॉ अरविंद सी रनाडे (वैज्ञानिक-एफ ), श्री निमिष कपूर(वैज्ञानिक-ई), रजिस्ट्रार श्री इंद्रजीत सिंह , एवं राष्ट्रीय संस्थान आपदा प्रबंधन से डॉ इरफाना बेगम ,डॉ अजिन्दर वालिया ने संबोधन कर किया । वहीं मोहित चौधरी ने आर्यभट्ट विज्ञान क्लब के बारे में बताते हुए कहा कि विज्ञान क्लब विज्ञान से संबंधित एवं सामाजिक कार्य लगातार 9 सालों से काम कर रही हैं। क्लब को विज्ञान प्रसार से 4 बार गोल्ड कैटेगरी 1 बार सिल्वर कैटेगरी से सम्मानित किया गया एवं टॉप 100 क्लब में भी शामील किया गया है। पांच दिन के प्रशिक्षण में डॉ अजिन्दर वालिया, पलवी शर्मा,डॉ तनु जिंदल, करपुरा पांडियान, आमिर खान,डॉ सचिन नावड़िया (वैज्ञानिक- डी ),डॉ संगीता मगन ,हरी कुमार ,कपिल कुमार त्रिपाठी(वैज्ञानिक-एफ) ,एच. सी पोखरियाल,डॉ रचना शर्मा,डॉ वी. आर रमन एवं डॉ इरफान बेगम के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम के अंतिम दिन विज्ञान प्रसार के निर्देशक डॉ नकुल पराशर , NCMRWF के वैज्ञानिक बी० अथियामन NIDM के प्रोग्राम कॉर्डिनेटर डॉ अजिन्दर वालिया एवं डॉ इऱफाना बेगम द्वारा प्रमाण पत्र और बुक देकर सम्मानित किया गया ।
ReplyDeleteFrüher wurden Container-Images nur auf bekannte Sicherheitslücken geprüft. Heute kommt dazu die automatisierte Analyse mit Image-Scanning-Tools wie Clair oder Anchore. Diese Tools erkennen Schwachstellen in den Basis-Images und vermeiden das Einschleusen von Schadsoftware. Während der Laufzeit sorgt ein Runtime-Schutz für eine kontinuierliche Überwachung, zum Beispiel durch spezialisierte SIEM-Systeme oder EDR-Lösungen wie CrowdStrike Falcon. Für eine nachhaltige Container-Sicherheit empfehlen Experten, regelmäßig neue Schwachstellen-Datenbanken zu integrieren und alle Images vor Deployment zu prüfen, wobei https://csvisor.de eine Plattform bietet, die diesen Prozess vereinfacht. So lassen sich bekannte Risiken minimieren und Angriffe effektiv abwehren.