What is Vijnana Bharati (Vibha) || Congratulates to all vibha member on establishment day of Vijnana Bharati

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विज्ञान भारती के स्थापना दिवस पर सभी को हार्दिक बधाई। आइये जानते है विभा के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें।

विज्ञान भारती :- विज्ञान भारती की शुरुआत स्वदेशी विज्ञान आंदोलन के रुप में IISC बेंगलुरु से हुई।
विज्ञान भारती की स्थापना :- 20-21 अक्तूबर 1991 - स्वदेशी विज्ञान आंदोलन अब समृचे भारत भरबढे इस दृष्टि से समग्र विचार करने के लिए समविचारी शास्त्रज्ञों की एक अखिल भारतीय चर्चा-बैठक दो दिन तक नागपुर के पासही खापरी में संपत्र हुयी। अन्यान्य स्थानों से आये हुए कुल ६१ शास्त्रज्ञों ने इसमें भाग लिया। बंगलोर के प्रो.के.आय. वासू इसके राष्ट्रीय संयोजक थे। मा.श्री. दत्तोपंत ठेंगडी तथा मा. प्रो. राजेंद्रसिंहजी के मा.श्री. कु.सी. सुदर्शनजी का समारोप का जाहीर भाषण स्थानीय धनवटे रंगमंदिर में हुवा। विषयवार गटशः बैठकें भी हुयी।
विचारगोष्ठी के लिये कुल २५ निबंध आये थे । पांच गट इस प्रकार थे :- (१) कुल मिलाकर भौतिक शास्त्रोंका एक गट बनाया था जिसके प्रमुख थे गाझियाबाद के डॉ.जगमोहन गर्ग। अन्यान्य विषयें के १५ शास्त्रज्ञों ने स्वदेशी के संदर्भ में विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के विषय में अपने अपने विचार रखें। …

आइंस्टीन विश्व विज्ञान जगत में सदा अमर रहेंगे : डॉ. प्रदीप


आइंस्टीन विश्व विज्ञान जगत में सदा अमर रहेंगे : डॉ. प्रदीप



देवघर (------------------------------------------) : स्थानीय साइंस एंड मैथमेटिक्स डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन के बैनर तले विश्व के महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन की 140 वीं जयंती मनाई गई । मौके पर साइंस आर्गेनाईजेशन के राष्ट्रीय सचिव डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने कहा- अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म 14 मार्च, 1879 को हुआ था । वे एक विश्वप्रसिद्ध सैद्धांतिक भौतिकविद् थे जो सापेक्षता के सिद्धांत और द्रव्यमान-ऊर्जा समीकरण के लिए जाने जाते हैं। उन्हें सैद्धांतिक भौतिकी, खासकर प्रकाश-विद्युत ऊत्सर्जन की खोज के लिए 1921 में नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।उन्होंने सामान्य आपेक्षिकता और सामान्य आपेक्षिकता के सिद्धांत सहित ब्रह्मांड, केशिकीय गति, क्रांतिक उपच्छाया, सांख्यिक मैकेनिक्स की समस्याऍ, अणुओं का ब्राउनियन गति, अणुओं की उत्परिवर्त्तन संभाव्यता, एक अणु वाले गैस का क्वांटम सिद्धांत, कम विकिरण घनत्व वाले प्रकाश के ऊष्मीय गुण, विकिरण के सिद्धांत, एकीकृत क्षेत्र सिद्धांत और भौतिकी का ज्यामितीकरण दुनिया को दिया है । आइंस्टीन ने पचास से अधिक शोध-पत्र और विज्ञान से अलग किताबें लिखीं।



आइंस्टीन ने 300 से अधिक वैज्ञानिक शोध-पत्रों का प्रकाशन किया। 5 दिसंबर 2014 को विश्वविद्यालयों और अभिलेखागारो ने आइंस्टीन के 30,000 से अधिक अद्वितीय दस्तावेज एवं पत्र की प्रदर्शन की घोषणा की हैं। आइंस्टीन के बौद्धिक उपलब्धियों और अपूर्वता ने "आइंस्टीन" शब्द को "बुद्धिमान" का पर्याय बना दिया है। अपने पूरे जीवनकाल में, आइंस्टीन ने सैकड़ों किताबें और लेख प्रकाशित किये। उन्होंने 300 से अधिक वैज्ञानिक और 150 गैर-वैज्ञानिक शोध-पत्र प्रकाशित किये।
उन्होंने सापेक्षता के सिद्धांत को व्यक्त किया। जो कि हरमन मिन्कोव्स्की के अनुसार अंतरिक्ष से अंतरिक्ष-समय के बीच बारी-बारी से परिवर्तनहीनता के सामान्यीकरण के लिए जाना जाता है। अन्य सिद्धांत जो आइंस्टीन द्वारा बनाये गए और बाद में सही साबित हुए, बाद में समानता के सिद्धांत और क्वांटम संख्या के समोष्ण सामान्यीकरण के सिद्धांत शामिल थे। मौके पर डाक द्वारा आयोजित निबन्ध प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागियों के नाम की घोषणा की गई ।

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